Friday, 31 May 2013

धूल वशीकरण



धूल वशीकरण-
१॰धूल-धूल-तू धूल की रानी, जगमोहन सुन मोर बानी। जल से धुला आन पढूँ, तब पार्वती वरदान धूलि पड़ि। दू अमुकी अंग, जो जलती आती उमंग, उसका मन लावे निकाल, हमारी वश्यता करे स्वीकार।।
विधि- सिद्धि हेतु होलीकी रात्रि में ११ माला जप करे। प्रयोग के समय साध्या के बाँए पैर की मिट्टी लेकर उसे उक्त मन्त्र से २१ बार अभिमन्त्रित करे। मन्त्र मेंअमुकीशब्द के स्थान पर साध्या का नाम कहे। फिर एक चुटकी मिट्टी साध्या के सिर पर सावधानी-पूर्वक डाले।
२॰ ॐ नमो आदेश गुरु का, धूली-धूली विकट चाँदनी पर मारु धूली। फिर दिवाना महल तजे, घर-दुआर तजे, ठाठा भरतार तजे। देवी-दिवानी एक सठी फलवान, तू नरसिंह वीर। अमुकीको उठाय ला। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा।
विधि- सिद्धिहेतु किसी शनिवार से उक्त मन्त्र का जप प्रारम्भ करे। जप २१ दिन तक करे। प्रयोग के समय जिस स्त्री की मृत्यु शनिवार को हुई हो, श्मशान-क्रिया के पश्चात् उसके पैर की ओर का अंगार (कोयला) लाए तथा चौराहे की चुटकी भर धूल लेकर उसमें कोयले को पीस कर मिलाए। फिर उक्त मन्त्र से उसे ७ बार अभिमन्त्रित कर युक्ति-पूर्वक साध्या के शरीर पर डाले।
३॰ ॐ नमः धूली धूलेश्वरी, मातु परमेश्वरी, चञ्चती जय इनारन। चोप भरे छार-छारते में हटे, देता घर-बार, करे तो मशान लौटे। जीवे तो पाव लौटे। वचन बाँधी। अमुकीको धाई लाव, मातु धूलेश्वरी। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा। ठः ठः स्वाहा।
विधि- सिद्धि हेतु ७ शनिवार (केवल शनिवार को) उक्त मन्त्र १४४ बार जपे। १४४ की संख्या को ध्यान में रखे। कम या ज्यादा न जपे। अन्तिम ७वें शनिवार को जप कर, ‘रविवारके दिन जो स्त्री मरे व जिसका रविवार को ही दाह-कर्म हो, उसकी चिता से तीन चुटकी राख लेकर उसमें चौराहे की थोड़ी धूल मिलाए। फिर उसे उक्त मन्त्र से अभीमन्त्रित कर साध्यापर डाले। मन्त्र में अमुकीके स्थान पर साध्या का नाम ले।
४॰ खरी सुपारी, टाम नगारी। राजा परजा, खरी पियारी। मन्त्र पढ़ लगाऊ, तो रहिया कलेजा लावे दौड़, जीवित चाटै पग-तली। मूवे सेवे मसान या शब्द की मारी, न लावे तो जयी हनुमन्त की आन। शब्द साँचा, पिण्ड कांचा। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा।
विधि- पहमेसूर्यया चन्द्रग्रहण में ३ माला जप करे। फिर सामान्य दिनों मेंशनिवारसे जप प्रारम्भ करे तथा नित्य २१ दिन तक एक माला जप करे। प्रयोग के समय सुपारी पर उक्त मन्त्र सात बार पढ़कर फूँक मारे और साध्या को खाने के लिए दे।

वशीकरण


हनुमान वशीकरण मन्त्र


ॐ राई वर राई पचरसी। बारह सरसू तेरह राई। नब्बे दिन मंगलवार को ऐसी भाऊ, पराई स्त्री (साध्या का नाम) को भूल जाए घर-बार। घर छोड़, घर की डौरी छोड़। छोड़ माँ-बाप और छोड़ घर का साथ, हो जा मेरे साथ। दुहाई तुझे हलाहल हनुमान की। मेरा काम जल्दी कर, नी करे तो माँ अञ्जनी के सेज पर पाँव धरे। तेरी माता का चीर फाणीने लँगोट करे। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा।
विधि- उक्त मन्त्र को पहले नवरात्रया ग्रहणमें सिद्ध करे। नवरात्रमें मंगल और शनिवार को हनुमान जी को चोला चढ़ाए और प्रतिदिन हनुमान जी की मूर्ति के समक्ष १०८ बार जप करे। जप के समय अपने पास राईऔर सरसोंरखे। मन्त्र पढ़कर इन्हें अभिमन्त्रित करे। बाद में आवश्यकतानुसार प्रयोगकरे। प्रयोग के समय चतुराई से तेरह राई साध्याकी डेहरी पर डाले और बारह सरसों उसके घर पर फेंके।

 

Thursday, 30 May 2013

चमत्कारी पौधा - बान्दा

मित्रो जब किसी पेड़ से जुड़कर कोई अन्य प्रकार की बेल निकलती है उसे बान्दा कहते है , बांदा एक प्रकार का पौधा होता है जो जमीन पर न उगकर किसी वृक्ष पर उगता है। इस प्रकार यह एक परोपजीवी पौधा है जो किसी अन्य पेड़-पौधे पर उगकर उसी के तत्वों से पोषित होता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार प्रत्येक पेड़ पर उगा बांधा एक विशेष फल देता है। जानते हैं किस पेड़ का बांदा किस कार्य के लिए उपयोगी होता है-
1- बेर का बांदा- बेर के बांदे को विधिवत तोड़ कर लाने के पश्चात देव प्रतिमा की तरह इसको स्नान करवाएं व पूजा करें। इसके बाद इसे लाल कपड़े में बांधकर धारण कर लें। इस प्रकार आप जो भी इससे मांगेंगे वह सब आपको प्राप्त होगा।

2- बरगद का बांदा- यह बांदा बाजू में बांधने से हर कार्य में सफलता मिलती है और कोई आपको हानि नहीं पहुंचा सकता।

3- हरसिंगार का बांदा- यह बांदा काफी मुश्किल से मिलता है। यदि हरसिंगार के बांदे को पूजा करने के बाद लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखें तो आपको कभी धन की कमी नहीं होगी।

4- अनार का बांदा- इस बांदे को पूजा करने के बाद घर में रखने से किसी की बुरी नजर नहीं लगती और न ही भूत-प्रेत आदि नकारात्मक शक्तियों का घर में प्रवेश होता है।

5- आंवले का बांदा- आंवले का बांदा भुजा में बांधने से चोर, डाकू, हिंसक पशु का भय नहीं रहता।

6- नीम का बांदा- नीम के बांदे को अपने दुश्मन से स्पर्श करा दें तो उसके बुरे दिन शुरु हो जाते हैं।

गोमती चक्र के प्रयोग






१॰ यदि इस गोमती चक्र को लाल सिन्दूर की डिब्बी में घर में रखे, तो घर में सुख-शान्ति बनी रहती है ।
२॰ यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो, तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर से घुमाकर आग में डाल दे, तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है ।

३॰ यदि घर में बिमारी हो या किसी का रोग शान्त नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चाँदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पाये पर बाँध दें, तो उसी दिन से रोगी का रोग समाप्त होने लगता है ।

४॰ व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बाँधकर ऊपर चौखट पर लटका दें, और ग्राहक उसके नीचे से निकले, तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है ।

५॰ प्रमोशन नहीं हो रहा हो, तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मन्दिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें, और सच्चे मन से प्रार्थना करें । निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जायेंगे ।
६॰ पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में हलूं बलजादकहकर फेंक दें, मतभेद समाप्त हो जायेगा ।
७॰ पुत्र प्राप्ति के लिए पाँच गोमती चक्र लेकर किसी नदी या तालाब में हिलि हिलि मिलि मिलि चिलि चिलि हुं पाँच बार बोलकर विसर्जित करें ।
८॰ यदि बार-बार गर्भ नष्ट हो रहा हो, तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बाँधकर कमर में बाँध दें ।
९॰ यदि शत्रु अधिक हो तथा परेशान कर रहे हो, तो तीन गोमती चक्र लेकर उन पर शत्रु का नाम लिखकर जमीन में गाड़ दें
१०॰ कोर्ट-कचहरी में सफलता पाने के लिये, कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर अपना दाहिना पैर रखकर जावें ।
११॰ भाग्योदय के लिए तीन गोमती चक्र का चूर्ण बनाकर घर के बाहर छिड़क दें ।
१२॰ राज्य-सम्मान-प्राप्ति के लिये दो गोमती चक्र किसी ब्राह्मण को दान में दें ।
१३॰ तांत्रिक प्रभाव की निवृत्ति के लिये बुधवार को चार गोमती चक्र अपने सिर के ऊपर से उबार कर चारों दिशाओं में फेंक दें ।
१४॰ चाँदी में जड़वाकर बच्चे के गले में पहना देने से बच्चे को नजर नहीं लगती तथा बच्चा स्वस्थ बना रहता है ।
१५॰ दीपावली के दिन पाँच गोमती चक्र पूजा-घर में स्थापित कर नित्य उनका पूजन करने से निरन्तर उन्नति होती रहती है ।
१६॰ रोग-शमन तथा स्वास्थ्य-प्राप्ति हेतु सात गोमती चक्र अपने ऊपर से उतार कर किसी ब्राह्मण या फकीर को दें ।
१७॰ 11 गोमती चक्रों को लाल पोटली में बाँधकर तिजोरी में अथवा किसी सुरक्षित स्थान पर सख दें, तो व्यापार उन्नति करता जायेगा ।